पुण्यतिथि पर हुआ काब्य गोष्ठी का आयोजन
हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)
सोंनभद्र, रॉबर्ट्सगंज। रविवार को लोकतंत्र सेनानी समाजसेवी पत्रकार साहित्यकार सोन साहित्य संगम सोनभद्र के संस्थापक निदेशक स्वर्गीय योगेश शुक्ला उर्फ योगेश शेखर जी की द्वितीय पुण्यतिथि पर उनके निज आवास “योगीताश्रम” पर रविवार को दोपहर 12:00 बजे से श्रद्धाजंलि सभा एवं काब्य गोष्ठी का आयोजन सोन साहित्य संगम के तत्वाधान में कराया गया। जिसकी अध्यक्षता संत कीनाराम महाविद्यालय के प्राचार्य डा0 गोपाल सिंह ने किया एवम संचालन सोन साहित्य संगम के संयोजक अधिवक्ता राकेश शरण मिश्र ने किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में मधुरिमा के निदेशक अजय शेखर उपस्थित थे। इसके अतरिक्त विशिष्ट अतिथि के रुप में वरिष्ठ साहित्यकार कथाकार रामनाथ शिवेंद्र, जगदीश पंथी, सुशील राही उपस्थित थे।कार्यक्रम के प्रारम्भ में आये हुए अतिथियों द्वारा योगेश शुक्ल जी के चित्र पर द्वीप प्रज्ज्वलित एवम पुष्प अर्पित करके किया गया। इसके बाद कवि सरोज सिंह द्वारा माँ सरस्वती वंदना गा कर काब्य गोष्ठी की विधिवत शुरुआत की गई। तत्पश्चात योगेश शुक्ल के पुत्रों द्वारा मुख्य अतिथि अजय शेखर जी का योगेश जी की स्मृति में अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

इसके बाद उपस्थित कवियों में मुख्य रूप से जगदीश पंथी सुशील राही, रचना तिवारी,प्रदुम्न तिवारी,अशोक तिवारी, राकेश शरण मिश्र ने अपने सुंदर काब्यपाठ से उपस्थित श्रोताओं को काब्य रस में सराबोर कर दिया। वही मुख्य अतिथि अजय शेखर ने योगेश शुक्ला के साथ बिताए गए समय को याद करते हुए उन्हें विशाल ब्यक्तित्व का स्वामी बताया। विशिष्ट अतिथि रामनाथ शिवेन्द्र ने कहा कि योगेश जी पूर्ण मनुष्य थे और उन्हें शब्दो मे या कविताओं में नही बांधा जा सकता।

विंध्य संस्कृति शोध समिति के निदेशक दीपक केसरवानी ने कहा कि विंध्य रत्न से सम्मानित योगेश जी के बारे में कुछ भी कहना सूरज की दिया दिखाने के बराबर होगा। इसके अतिरिक्त कृष्ण मुरारी गुप्ता, हिदायत उल्ला खान, शशांक शेखर कात्यायन ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें महान समाज सेवी,बेमिसाल ब्यक्तित्व का स्वामी बताया। कार्यक्रम में रामदेव मौर्य,जितेंद्र सिंह,अजय पांडे रामकुमार शर्मा,हिदायतुल्ला,राम जग मौर्य,जितेंद्र सिंह,राकेश अरीमर्दन,शैलेश कुमार सिंह, पंकज कुमार सिंह, मनीष पांडे एवम नगर के अनेकों संभ्रांत लोग उपस्थित थे।

