• जिला जज रजत कुमार जैन ने माल्यार्पण कर साहित्यकारों का किया सम्मान।
• कार्यक्रम मे श्रुति लेखन प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित।
• सोनभद्र बार एसोसिएशन एवं सोन साहित्य संगम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुआ कार्यक्रम।

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)
रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। हम आज के दिन संकल्प लेते हैं कि हम हिंदी को प्रोत्साहित करेंगे एवं घर, कार्यालय में हिंदी भाषा का प्रयोग बहुलता करेंगे। संपूर्ण देश में हिंदी के उत्थान के क्षेत्र में जनपद सोनभद्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । उपन्यासकार देवकीनंदन खत्री ने जनपद सोनभद्र के विजयगढ़, मिर्जापुर जनपद के चुनार, चकिया स्थित नौगढ़ आदि स्थानों पर अवस्थित किला, दुर्ग, एय्यारी पर आधारित चंद्रकांता, चंद्रकांता संतति की रचना कर गैर हिंदी भाषियों को हिंदी सीखने और अपनी कृति पढ़ने के लिए मजबूर कर दिया था, गोस्वामी तुलसीदास, कबीर दास, रहीमदास, रसखान की भाषा हिंदी थी, हिंदी को रोजगार की भाषा बनाने के लिए हिंदी भाषी लोगों को आगे आना चाहिए और आर्थिक, शारीरिक, मानसिक रूप से इसके उत्थान के लिए तैयार रहना चाहिए तभी हमारी मातृभाषा हिंदी का उत्थान होगा।
उपरोक्त विचार जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रजत कुमार जैन ने 14 सितंबर (हिंदी दिवस) के अवसर पर कचहरी स्थित सोनभद्र बार एसोसिएशन के सभागार में सोनभद्र बार एसोसिएशन एवं सोन साहित्य संगम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित साप्ताहिक दिवस कार्यक्रम/ विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम सोनभद्र बार एसोसिएशन एवं सोन साहित्य संगम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित विंध्य संस्कृति समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी, सोन साहित्य संगम के संयोजक राकेश शरण मिश्र, राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत शिक्षक /साहित्यकार ओम प्रकाश त्रिपाठी, वरिष्ठ कवि पारसनाथ मिश्रा, जगदीश पंथी, सुशील “राही,”सरोज सिंह,प्रदुमन त्रिपाठी, दिवाकर द्विवेदी “मेघ विजयगढ़ी”, अशोक तिवारी, दयानंद दयालु, धर्मेश चौहान,राधेश्याम पाल, दिलीप सिंह “दीपक,”कवित्री डॉक्टर रचना तिवारी, कौशल्या कुमारी चौहान सहित उपस्थित साहित्यकारों एवं कवियों को माल्यार्पण कर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने सम्मानित करते हुए हिंदी दिवस की बधाई एवं शुभकामना दिया।

इस अवसर पर पूर्व में आयोजित त्रिस्तरीय श्रुत लेखन प्रतियोगिता में लिपिक संवर्ग में डॉo अनुराग श्रीवास्तव को प्रथम स्थान , शशांक शुक्ला को द्वितीय स्थान तथा शुभम श्रीवास्तव को तृतीय स्थान मिला। आशु लिपिक संवर्ग में प्रथम स्थान सुफियान अंसारी, द्वितीय स्थान राजकरन, तृतीय स्थान परषोत्तम चौधरी को मिला। वहीं चतुर्थ श्रेणी संवर्ग में प्रथम स्थान अविनाश पटेल, द्वितीय स्थान चंद्र प्रकाश शुक्ल को एवं तृतीय स्थान बृजेश कुमार विश्वकर्मा को मिला।, विजेता कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र जनपद एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सोनभद्र बार एसोसिएशन के परिसर में स्थापित मां सरस्वती के प्रतिमा पर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश सहित अन्य अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर, कवि दिवाकर द्विवेदी “मेंघ विजयगढी” द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ।
गोष्ठी की अध्यक्षता सोनभद्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश द्विवेदी अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि-“हिंदी भाषा हमारी मातृभाषा है और हमें इस भाषा के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए और सबसे पहले अपने घर से इसकी इसकी शुरुआत करनी चाहिए।”
कार्यक्रम में उपस्थित न्यायाधीशगण, वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण प्रताप सिंह, गजेंद्र नाथ दीक्षित सहित अन्य विद्वानों ने अपना-अपना विचार व्यक्त किया और उपस्थित कवियों ने अपनी काव्य रचना सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता रामचंद्र मिश्र ने किया।

