संत नहीं चाहते फिल्मी हस्तियां बने रामलीला का पात्र, संतो ने कहा- भद्दा प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं

• 17 सितंबर को संत समाज का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर फिल्मी हस्तियों की रामलीला पर विरोध दर्ज कराएगा।

फिल्मी हस्तियों की रामलीला का 3 महीने से संतो द्वारा विरोध किया जा रहा है।

80% संत नहीं चाहते फिल्मी हस्तियां बने रामलीला का पात्र।

संस्कृति लाइव संवाददाता, अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में 6 अक्टूबर से होने वाली फिल्मी हस्तियों की रामलीला का संत समाज विरोध कर रहा है। संत समाज का कहना है कि अयोध्या में रामलीला के नाम पर भद्दा प्रदर्शन, कलाकारों द्वारा शराब और मांस खाने और मुगलिया वेशभूषा में मंचन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अयोध्या की रामलीला में फिल्मी हस्तियों के शामिल होने पर संत समाज को नाराजगी है। उनका कहना है कि अगर सरकार इस पर ध्यान नहीं देगी, तो 17 सितंबर को संत समाज का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर फिल्मी हस्तियों की रामलीला पर विरोध दर्ज कराएगा।

नारद मुनि के साथ कई देवी-देवताओं की वेशभूषा खराब की
अयोध्या में मंदिर के अंदर संतों की एक बैठक फिल्मी हस्तियों की रामलीला के विरोध में की गई। इस बैठक में संत समाज के महंत धर्माचार्य शामिल हुए। बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास का कहना है कि अयोध्या की रामलीला के नाम पर भद्दा प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शराब और मांस खाने वाले कलाकारों का विरोध हो रहा है। महंत अवधेश दास ने कहा कि पिछले साल अयोध्या की रामलीला में मंच पर नारद ने मुगलिया शेरवानी व नागरिया जूता पहन रखा था। जो नारद की वेशभूषा रही ही नहीं है। अयोध्या मर्यादित नगरी है। यहां अमर्यादित वेशभूषा, अमर्यादित साहित्य की रामलीला नहीं चलेगी। इसका विरोध होगा। अयोध्या में उपासना, साधना, मर्यादा, सनातन की रामलीला होनी चाहिए। ना की फिल्मी हस्तियों की रामलीला. क्योंकि फिल्मी दुनिया के लोग धर्म का सत्यानाश कर रहे हैं।

“रामलीला का स्वरूप नहीं बिगाड़ा जाना चाहिए”
वहीं, व्याख्या कथा व्यास पवन शास्त्री का कहना है कि संत समाज रामलीला का विरोध नहीं कर रहा। अयोध्या राम, रामलीला, रामचरितमानस की भी जन्मभूमि है। श्री राम के चरित के बारे में खुद रावण ने कहा कि राम जी का मुखौटा लगा लेने से सारे विश्व की संपदा तुक्ष लगती है। वर्चुअल रामलीला होते हुए संदेश एक्चुअल देना अयोध्या के रामलीला की परंपरा वास्तविकता है। रामलीला का स्वरूप नहीं बिगाड़ा जाए।

भ्रष्ट लोगों को रामलीला का पात्र बनाये जाने का विरोध
बता दें, फिल्मी हस्तियों की रामलीला का 3 महीने से विरोध किया जा रहा है। 80 प्रतिशत संत विरोध कर रहे हैं। सरकार अगर आराध्य के चरित्र की परिभाषा तय करे, यह उचित नहीं है। संत इसको पसंद नहीं करेंगे। फिल्मी हस्तियों के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलना होगा मिलेंगे। राशिकपीठाधिस्वर महंत जनमेजय शरण ने भी फिल्मी हस्तियों की वर्चुअल रामलीला का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि रामलीला का विरोध नहीं है। रामलीला के उपहास का विरोध है। राम ने 5 लीला की हैं. पांचों लीलाओं को दिखाना चाहिए। रामानंद सागर की रामलीला को आज भी पसंद किया जा रहा है। भ्रष्ट लोगों को रामलीला का पात्र बनाये जाने का विरोध है। संतों की बैठक में नागा रामलखन दास, संत कविराज कबीर सहित कई संत महंत शामिल हुए।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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