दीपक कुमार केसरवानी (साहित्यकार)
आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हिंदी दिवस के अवसर पर मनाया जाने वाला साहित्य उत्सव अपने आप में महत्वपूर्ण है।
रॉबर्ट्सगंज नगर के प्रख्यात साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद खादिम का मानना था कि भाषा वही जीवित रहती है जिसका प्रयोग जनता करती है।
यही कारण था कि आजादी के बाद भारत में बहु प्रचलित भाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए देश के जाने माने साहित्यकार काका कालेकर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविंद दास, व्यवहार राजेंद्र सिंह के आंदोलन को समर्थन देते हुए मिर्जापुर जनपद के साहित्यकारों के साथ मिलकर आंदोलन चलाया और इस आंदोलन के परिणाम स्वरूप हिंदी भाषा को भारतीय संविधान में राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता मिली।
साहित्यकार प्रतिभा देवी के अनुसार-“14 सितंबर 1949 को मूर्धन्य साहित्यकार व्यवहार राजेंद्र सिंह के 50 वें जन्मदिन को हिंदी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।
14 सितंबर सन 1950 को भारतीय संविधान ने इसे अंगीकार किया और 26 जनवरी 1950 को देश के संविधान द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने के विचार को मंजूरी दे दी गई।
भारत के प्रत्येक भाग में हिंदी भाषा को प्रचारित एवं प्रसारित करने के लिए 14 सितंबर 1953 से हिंदी दिवस मनाए जाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद खादिम विचार गोष्ठियों का आयोजन आजीवन करते रहे।
हिंदी भाषा के उत्थान में रॉबर्ट्सगंज नगर में संचालित राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रुद्र प्रसाद श्रीवास्तव, हिंदी के विद्वान डॉक्टर पशुपति नाथ दुबे, कमला प्रसाद श्रीवास्तव (कवि जी) पत्रकार निरंजन लाल जालान, महावीर जालान, सत्यनारायण जालान,चंद्रशेखर शुक्ला,तेज बहादुर सिंह, हंस नाथ पांडेय, एम० ए०खान, रघुवीर चंद जिंदल आदि दिवंगत विद्वानों का योगदान रहा। “
अधिवक्ता ज्ञानेंद्र शरण राय का मत है कि-“मातृभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए उत्तर भारत में अंग्रेजी हटाओ आंदोलन चलाया गया जो काफी हद तक सफल रहा।
हिंदी साहित्य के इतिहास के आईने में झांक कर देखा जाए तो
स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महात्मा गांधी गुजराती थे, सी. राजगोपालाचारी मद्रासी थे, राजा राम मोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर व देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय जैसे महान दार्शनिक व क्रांतिकारी बंगाली थे, ऐसे ही देश के अलग-अलग प्रांतों के क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता आंदोलन का माध्यम हिंदी भाषा को बनाया। और स्वाधीनता का संदेश देशभर में जन-जन तक पहुंचाया।
क्रांतिकारी, देशभक्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हिंदी के गीत गाते हुए फांसी के फंदे को चूम लिया और वंदे मातरम, भारत माता की जय, इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए देश पर कुर्बान हो गए थे, यह ताकत थी हमारी हिंदी भाषा की।
हिंदी भाषा में प्रकाशित समाचार पत्र और साहित्य स्वतंत्रता आंदोलन का संबल बनी।
हिंदी के महत्त्व को गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का विचार था कि-” ‘भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी’।
महात्मा गांधी ने कहा था कि-” राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है।
स्वतंत्रता आन्दोलन में हिंदी पत्रकारिता ने अहम भूमिका अदा किया।
सोनघाटी पत्रिका के विधिक सलाहकार-“ हिन्दी जन-जन की भाषा, देश की प्रभावशाली विरासत,सरलता, बोधगम्य और शैली की दृष्टि से विश्व की भाषाओं में हिन्दी महानतम स्थान रखती है। हिंदी हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक है। बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली वैज्ञानिक भाषा है, जो हमारे पारम्परिक ज्ञान,प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु करती है। हिंदी भारत संघ की राजभाषा होने के साथ ही ग्यारह राज्यों और तीन संघ शासित क्षेत्रों की भी प्रमुख राजभाषा है। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ-साथ हिंदी का एक विशेष स्थान है।
हिंदी विदेश मंत्रालय द्वारा ‘‘विश्व हिंदी सम्मेलन’’ और अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा ‘‘प्रवासी भारतीय दिवस’’ मनाया जाता है जिसमें विश्व भर में रहने वाले प्रवासी भारतीय भाग लेते हैं। विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम से भारतीय मूल्यों का विश्व में और अधिक विस्तार हो रहा है। विश्वभर में करोड़ों की संख्या में भारतीय समुदाय के लोग एक संपर्क भाषा के रूप में हिन्दी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को एक नई पहचान मिली है। यूनेस्को की सात भाषाओं में हिंदी को भी मान्यता मिली है।
भारतीय विचार और संस्कृति का वाहक होने का श्रेय हिन्दी को है। आज संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं में भी हिंदी की गूंज सुनाई देने लगी है। हिंदी के इसी महत्व को देखते हुए तकनीकी कंपनियां इस भाषा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं। सूचना प्रौद्योगिकी में हिन्दी का इस्तेमाल बढ़ रहा है। आज वैश्वीकरण के दौर में हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है।यह उन सात भाषाओं में से एक है जो वेब एड्रेस बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं।आज पूरी दुनिया में 175 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा पढ़ाई जा रही है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें बड़े पैमाने पर हिंदी में लिखी जा रही है। सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है।
हिंदी भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा बनकर उभरी है। विदेशी शक्तियां भारत में व्यापार करने के लिए अपने लोगों को हिंदी सिखा रही हैं। देश में करीब 50 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी बोलते हैं।
हिंदी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और झारखंड सहित कई भारतीय राज्यों की आधिकारिक भाषा है। बिहार देश का पहला राज्य था जिसने अपनी एकमात्र आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाया है।दुनिया भर में लोग हिंदी गीतों और हिंदी फिल्मों को प्यार करते हैं।
दुनिया में हर ध्वनि हिंदी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जा सकती है।
मॉरीशस की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री गायिका फिल्म कलाकार हौसिला देवी रिशोल ने दूरभाष पर अपना विचार प्रकट करते हुए कहा कि-
हिंदी भाषा का प्रयोग सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर के अन्य देशों में भी किया जाता है जिनमें पाकिस्तान, फिजी, नेपाल, मॉरीशस, श्रीलंका, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड अरब एमिरेट्स और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।”
हर साल 14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिंदी दिवस भारतीय संस्कृति को संजोने, सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने, समृद्धि का जश्न मनाने का दिन है।
जिस प्रकार हम धार्मिक सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय पर्व मनाते हैं उसी प्रकार हमें 14 सितंबर हिंदी दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाना चाहिए। हिंदी भाषा हमारे देश की आन बान शान है विश्व में भारत की पहचान है।
