शिकागो धर्म सम्मेलन की 128 वीं जयंती पर विशेष

मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी (विशेष संवाददाता)

ब्यूरो,सोनभद्र। देश की बिडंबना ही कही जाएगी कि आजादी के 74 साल के बाद भी हम अपनी युवा पीढ़ी के लिए स्वामी विवेकानंद को रोल मॉडल के रूप में पेश करने में नाकाम रहे हैं । यह बातें शिक्षाविद एवं हिंदी साहित्य के मर्मज्ञ प्रणेता और वरिष्ठ मंच संचालक भोलानाथ मिश्र ने शनिवार को शिकागो धर्म सम्मेलन के 128 वीं वर्षगांठ पर विशेष संवाददाता से बात चीत करते हुए कही।
श्री मिश्र ने बताया कि 11 सितम्बर 1893 को अमेरिका के शिकागो में विवेकानंद ने भारतीय अध्यात्म की जो छवि पेश की थी ,उससे विश्व बिरादरी भारतीय चिंतन की कायल हो गई थी । कभी न भुलाया जा सकने वाला ऐसा युवा संत जिसकी कीर्ति भारत में ही नही दुनियां के अन्य देशों तक फैली उन्हें हम युवाओं के आइकॉन के रूप में प्रस्तुत नही कर सके हैं ।

भारत का एक ऐसा सच्चा संत सपूत जो शरीर से तो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन वे अपने विचारों से भारत के करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बना के बैठे हुए हैं । 128 साल पहले जो उन्होंने कहा था वही विषय आज आज़ादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में भी लोगो तक पहुँचाने के लिए सबसे बेहतरीन प्रेरक चिंतन है जिससे आज की युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सकती है ।
11 सितंबर , 1893 को शिकागो में विवेकानंद ने अपने उदबोधन में कहा था साम्प्रदायिकता,असहिष्णुता और उसके भयावह वंशज कट्टरवाद ने लंबे समय से इस खूबसूरत धरती पर कब्जा कर रखा है । उन्होंने धरती को हिंसा से भर दिया है । इसे अक्सर खून से भिगोया , सभ्यता नष्ट की और पूरे राष्ट्र को निराशा में डाला ।
श्री मिश्र ने यह भी बताया कि
स्वामी विवेकानंद ने भारत के समृद्ध इतिहास और मजबूत
सांस्कृतिक जड़ो की तरफ समूचे संसार का ध्यान आकर्षित किया । अमेरिका की बहनों और भाईयों का संबोधन कर उनके वैश्विक
भाईचारे का संदेश विश्व में गूंजा। श्री मिश्र जी यही नहीं रुके आगे यह अभी बताया कि विवेकानंद के विचार आज भी कितने प्रासंगिक है , इसे उनके इस कथन से समझा जा सकता है ‘मेरी राय में सर्व साधारण जनता की उपेक्षा एक बड़ा राष्ट्रीय पाप है,और यहीं कारण है, जिससे हमारा पतन हुआ है। कितना भी राज करे उस समय तक उपयोगी नही हो सकता,जब तक की भारती जनता फिर से अच्छी तरह सुरक्षित न हो जाय।

मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी (विशेष संवाददाता)

‘स्वामी विवेकानंद और गाजीपुर’ पुस्तक के लेखक विजयशंकर चतुर्वेदी कहते है कि मेरा मानना है देश के जन प्रीतिनिधि भी विवेकानंद के इस कथन से दिशा प्राप्त कर सकते हैं।
हिन्दू धर्म की विश्व में पताका फहराने वाले ध्वज संवाहक स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘वह शिक्षा किसी काम की नही जिससे किसी व्यक्ति को दो वक़्त की रोटी न मिल सके’।चाहे गरीब को रोटी या रोजगार देना हो या बात राष्ट्रवाद की करनी हो, स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं ।
भोलानाथ मिश्र ने यह भी बताया कि विवेकानंद एक बार यह भी कहे थे ‘मनुष्य ही देश का निर्माण करते हैं । केवल भूखंड में क्या रखा है ? सामाजिक व राजनीतिक विषयों में जब तुम जापानियों के समान सच्चे होंगे, तब तुम भी जापानियों की तरह बड़े हो जाओगे । जापानी लोग अपने देश के लिए सब कुछ निछावर करने को तैयार रहते हैं। इसलिए वे बड़े हो गए हैं ।
2021 की युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद को आईकॉन मानने लगे इसके लिए भारत सरकार को स्वामी जी के आदर्शो को उनके समक्ष उदाहरण बनाकर प्रस्तुत करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में जब हम 2022 को 15 अगस्त के दिन आज़ादी
के 75 वें साल में अमृत महोत्सव मनाएंगे तो अमृत की एक बूंद के रूप में किया गया यह प्रयास भी अमृत के रूप में साबित होगा!

भोलानाथ मिश्र ( शिक्षाविद, समालोचक एवं वरिष्ठ पत्रकार)

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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