• सम्मानित हुई साहित्यिक विभूतिया।
• समारोह में देश के कई राज्यों से आए साहित्यकारों ने अपना वक्तव्य दिया।
• समारोह में संगीत के कलाकारों ने मोहा सबका मन, मंत्रमुग्ध कर देने वाली दी प्रस्तुति।
• मुख्य वक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा भौतिकता के विकास में हम न भूल पर्वों की जड़ें।
ब्यूरो, प्रयागराज। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान की ओर से शनिवार को दो दिवसीय रजत जयंती समारोह का शुभारंभ हिंदुस्तानी एकेडेमी में हुआ। समारोह का उद्घाटन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस अवसर पर काव्य सम्राट प्रतियोगिता, पुस्तक विमोचन और भारतीय त्योहारों की वैज्ञानिकता विषय पर संगोष्ठी एवं उपाधि एवं सम्मान समारोह आयोजित की गई।

उद्घाटन सत्र में सरस्वती वंदना श्रीमती नुपूर मालवीय ने प्रस्तुत की। सर्वप्रथम काव्य सम्राट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। उसके बाद ‘भारतीय त्योहार एवं उनकी वैज्ञानिकता’ विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। उ0प्र0 के सोनभद्र जिले से आए हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि भारत का अतीत गौरवशाली रहा है। यहां का प्रत्येक दिन किसी न किसी पर्व, त्योहार से पूर्ण है। यहां की प्रकृति एवं प्राकृतिक वस्तुएं मानव जीवन के लिये संजीवनी है। यहां के समस्त पर्व न केवल पूरी धरा को कुछ नवीन स्वरुप देते है वरन मानव और प्रकृति के बीच अन्योन्याश्रित सम्बन्ध के द्वारा पूरी धरा को अनुपम वरदान स्वरुप आबद्ध किए है।
बिहार के पटना जिले से आई प्रो0 सुधा सिन्हा ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय त्योहार अपनी वैज्ञानिकता की सिघूफा के साथ जनमानस में सौहाद्र की भावना निर्माण करती है। वे हमें आध्यात्मिक बनाते है।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ0 विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारतीय त्योहार वैज्ञानिकता से युक्त है, जो प्रकृति से परिपूक्तता बनाए हुए जीवन दर्शन को पुष्ट करते है।
वहीं छत्तीसगढ़ से आई हुई डॉ0 अनूसूया अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि युगों से भारत के पर्वोत्सव राष्ट्रीय चेतना और एकता के प्रतीक, यहाँ के सांस्कृतिक चेतना के आध्यात्मिक रुप रहे है। भारत के जनमानस ने प्रकृति से अपना सीधा और सगा नाता जोड़े रखा है और यहां के प्राकृतिक उपादानों सूर्य, चंद्र, नदी, पहाड़, पेड़-पौधों की निरंतर पूजा पर्वोत्सव के उपलक्ष्य में होती है। ये पर्वोत्सव हमारी बौद्धिक चेतना व आंतरिक उर्जा को परिपुष्ट करते है।
परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य, डॉ0 शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, पुणे ने कि भारतीय त्योहार पूरे विश्व में मनाए जाते है। इन त्योहारों के उपलक्ष्य में पारस्परिक रूप से जुड़ते हुए हम हर्षोल्लास के साथ त्योहार मनाने के साथ भारतीय संस्कृति का पालन भी करते है। प्रारंभ में संस्थान के सचिव डॉ0 गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने प्रस्तावना में विषय के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

समारोह का दूसरा दिन
देवनागरी लिपि लिप्यंतरण की दृष्टि से अत्यंत सरल व व्यवस्थित होने के बावजूद देवनागरी लिपि में लिप्यंतरण तो नहीं, बल्कि उसका व्यापकस्तर पर लोकातंरण हो रहा है। यह बड़े आश्चर्य की बात है। इस आशय का प्रतिपादन हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज के अध्यक्ष डा. उदय प्रताप सिंह, राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त, उ.प्र.सरकार ने किया। वे विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के रजत महोत्सव के भौतिक समारोह में अध्यक्ष के रूप में अपना मंतव्य दे रहे थे। डा. सिंह ने आगे कहा कि, पच्चीस वर्ष का यह संस्थान युवावस्था में पहुंचा है, जिससे संस्थान में नए उमंग व उल्लास का भाव दिखाई देता है। देश की स्वैच्छिक हिंदी संस्थाएं ऐसा प्रयास करें कि हिंदी के माध्यम से देश व संस्कृति मजबूत हो जाये हैं।
‘हिन्दी प्रेम की भाषा है। भाईचारे की भाषा है। सद्भाव की भाषा है। हिन्दी लोकजन की भाषा बनेगी तब और समृद्ध होगी। देवनागरी लिपि वैज्ञानिक लिपि है। लेकिन वास्तव में देवनागरी की बजाय रोमन का प्रयोग किया जा रहा है। उक्त उद्गार आयोजन की अध्यक्षता कर रहे डा0 उदय प्रताप सिंह ने कहीं।
आयोजन के दूसरे सत्र का शुभारंभ निशा ज्योति संस्कार भारती विद्यालय के छात्राओं दीपिका गुप्ता, दिव्यांशी साहू, शिवांशी मिश्रा और रिया मौर्या द्वारा सुमधुर स्वरों में सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि राजभाषा आयोग, छ.ग. के पूर्व अध्यक्ष डा. विनय कुमार पाठक, विशिष्ट अतिथि किशोर न्यायालय के सदस्य ओमप्रकाश त्रिपाठी तथा अध्यक्षता कर रहे हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) डा. उदय प्रताप सिंह ने की। मंच पर संस्थान के अध्यक्ष डॉ0 शहाबुद्दीन नियाज़ शेख भी मंचासीन रहे।
द्वितीय सत्र में संस्थान के कुलगीत का लोकार्पण अध्यक्ष डॉ0 उदय प्रताप सिंह ने किया।

वही संस्थान के रजत स्मारिका का विमोचन डॉ0 उदय प्रताप सिंह, डॉ0 विनय कुमार पाठक, ओम प्रकाश त्रिपाठी, डॉ0 शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, डॉ0 गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी एवं डॉ0 मुक्ता कान्हा कौशिक द्वारा किया गया। इस अवसर पर राकेश मिश्रा की पुस्तक ‘मुक्तक माला’ का लोकार्पण भी किया गया।
समारोह में काव्य सम्राट प्रतियोगिता का भी अयोजन किया गया। प्रतियोगिता कई प्रतिभागियों ने भाग लिया। जिसमे की पुष्पा श्रीवास्तव प्रथम स्थान प्राप्त कर शैली काव्य सम्राट की विजेता बनी और दूसरे स्थान पर डा. वन्दना श्रीवास्तव वान्या-लखनऊ, तीसरे स्थान पर अर्चना कृष्ण पांडेय रहीं। काव्य सम्राट प्रतियोगिता प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली पुष्पा श्रीवास्तव को अतिथियों द्वारा सम्राट की पगड़ी, 11000/रुपये नगद, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।
वही लघुकथा प्रतियोगिता में संयुक्त स्थान पाने वाली संतोष शर्मा ‘शान’-हाथरस, उ.प्र तथा पूनम रानी शर्मा-कैथल, हरियाणा को दो हजार पांच सौ रुपये देकर लघु कथा सम्राट से सम्मानित किया गया।

आयोजित समारोह में साहित्यिक विभूतियों को सम्मानित किया गया जिसमें डॉ0 चन्द्र देव कवडे़-औरगाबाद, महाराष्ट्र, डॉ0 विनय कुमार पाठक-रायपुर, छ0ग0, नागरी लिपि परिषद-नई दिल्ली, डॉ0शांति चौधरी-प्रयागराज को रजत पदक, साहित्य रत्न- कुशलेन्द्र श्रीवास्तव-नरसिंहपुर, म.प्र., साहित्य श्री, डॉo सीमा वर्मा-लखनऊ, उ0प्र0, शिक्षकश्री-डॉoसिकन्दर लाल- प्रतापगढ़, उ.प्र., डा0 अन्नपूर्णा श्रीवास्तव-पटना, बिहार, डॉ0 राम नरेश सिंह ‘मंजूल’ -बस्ती, उ0प्र0, विजय कृष्ण त्रिपाठी-प्रयागराज, उ0प्र0, दीप्ति मिश्रा- प्रयागराज, उ0प्र0 को तथा कलाश्री जयराम पटेल-छ.ग. रहे।
समारोह में रामचंद्र-पुणे, महाराष्ट्र, कुसुम वर्मा-लखनऊ, वेदांग उदय कुलकर्णी-औरंगाबाद, महाराष्ट्र, सुधांशु अनंत परलीकर-औरंगाबाद, महाराष्ट्र, प्रमोद वसल-समाजश्री, डॉ0 सुनीता सिंह को शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया और आभासी नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम आने पर समृद्धि तिवारी, प्रयागराज को प्रथम तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम आने पर शुभ द्विवेदी-प्रयागराज को सम्मानित किया गया।
पवहारी शरण द्विवेदी स्मृति न्यास द्वारा नरेन्द्र भूषण, लखनऊ-कैलाश गौतम सम्मान-2020, डॉ0 प्रभाषु कुमार, प्रयागराज-राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान, वंदना श्रीवास्तव, लखनऊ-महादेवी वर्मा सम्मान, मीडिया फोरम ऑफ इंडिया तथा आनंदराम साहू, छ0ग0, को पत्रकारश्री से सम्मानित किया गया।
आयोजन में प्रसिद्ध लोक गायिका कुसुम वर्मा द्वारा लोकगीत, फिल्म संगीतकार आदि रामचंद्र-पुणे एवं उनके सहयोगी बांसुरी पर वेदांग कुलकर्णी एवं तबला पर सुधांशु परलीकर द्वारा गीत एवं ग़ज़ल प्रस्तुति की गई।

प्रारंभ में संस्थान के सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ0 गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने संस्थान के 25 वर्ष की विजयगाथा को विस्तार से रखते प्रकाश डाला। एक तरफ उन्होंने अपने सभी पूराने सहयोगियों को उनके योगदान के लिए स्मरण किया तथा वर्तमान पदाधिकारियों के योगदान की भी चर्चा की। इस यात्रा के अपने खट्टे-मीठे अनुभवों का साझा करते हुए कहा किसी भी व्यक्ति या संस्थान को सफल होने में दो तरह के लोगों का हाथ व साथ महत्वपूर्ण होता है पहला वे हाथ जो पैर खींचने के लिए प्रयोग किए जाते है तथा दूसरा वे हाथ जो सर पर पगड़ी पहनाने में प्रयोग किए जाते है। उन्होंने इन पंक्तियों से अपनी वाणी को विराम दिया कली कली महक रही गुलों पे भी निखार है, ये मौसम-ए-बहार है ये मौसम ए बहार है।
अतिथियों का स्वागत डॉ0 पूर्णिमा मालवीय और धन्यवाद ज्ञापन डॉ0 सीमा वर्मा ने किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ0 मधु शंखधर एवं डॉ0 वंदना श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर नुपुर मालवीय- प्रयागराज, पुष्पा श्रीवास्तव ‘शैली’ रायबरेली, सदाशिव विश्वकर्मा, निगम प्रकाश कश्यप-मिर्जापुर, उ.प्र., ईश्वर शरण शुक्ला, पूर्णिमा कौशिक-रायपुर, छ0ग0, डॉ0 उषा श्रीवास्तव मुजफ्फरपुर, बिहार, डॉ0 मुक्ता कान्हा कौशिक-रायपुर, छ0ग0,मु0 तारिक जिया-जौनपुर, शिखा भारती, डॉ0पूर्णिमा मालवीय, मोहित गोस्वामी, डॉ0 रेवा नन्दन द्विवेदी, आलोक चतुर्वेदी, दिव्यांशी श्रीवास्तव, पूर्णिमा मालवीय, अनिल गर्ग, विजय मालवीय, डीo वंसत कुमार साव, एम.एस.खान, शरत चन्द्र श्रीवास्तव, सतीश कुमार मिश्र, अनुकूल नितीन वारखेड़े, राकेश शरण मिश्र, राजीव कुमार शर्मा, गुलाम सरवर, सन्तोष यादव, कृष्ण कान्त गुप्ता सहित आदि उपस्थित रहे।

