हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)
रॉबर्ट्सगंज,सोनभद्र। मंगलवार को वैश्विक स्तर पर अपने गुणों के लिए विख्यात शिवलिंगी पौधे को वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर चतुर्वेदी के गांव स्थित परिसर मड़ई, तियरा में रोपित किया गया ।
जमशेदपुर टाटा में भी उद्योगपति रतन टाटा ने इसे अपने सार्वजनिक उद्यान में लगा रखा है। बंगलौर के रामकृष्ण मिशन आश्रम में भी यह वृक्ष अपने विशिष्ट गुणों से सुशोभित हो रहा है। देश के कई अन्य स्थानों पर भी इसे देखा जा सकता है।
गुजरात में इसे कैलाशपति व शिवलिंगी बोलते हैं, आंध्रप्रदेश में नागलिंगम, महाराष्ट्र में कैलाशपति , तमिलनाडु व आसाम में नागलिंगम, पश्चिम बंगाल में कमान गोला बोला जाता है।

रूस में इसे कुरूपिता गिवानस्किया , जर्मनी में कैनान कुगेलबम , फ्रांस में कॉरोपसमाउ बोला जाता है।
यह couroupita guianensis ग्रुप का Royal paradise rare common ball tree है । इसे 1775 में लेसिथिसासी ने पहलीबार वर्णित किया था।
पर्यावरण सरंक्षण को समर्पित संस्था ” हरि छाया ” के सुमित शाह ने विजय शंकर चतुर्वेदी के अनुरोध पर हैदराबाद से मंगा कर इसे रोपित कराया ।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर चतुर्वेदी ने इस वृक्ष के औषधीय और पर्यावरणीय गुणों पर प्रकाश डाला।

विन्ध्य संस्कृति शोध समिति के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी ने वृक्षों को मानवता का मित्र बताते हुए ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण पर जोर दिया । इस अवसर पर समाजसेवी कृपाशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि प्रकृति हमें सब कुछ देती है बावजूद हम उसका संरक्षण नहीं करते, उन्होंने कहा कि वृक्षों की देखभाल को अपनी दैनिक जीवनचर्या में शामिल करने की जरूरत है। राजन चतुर्वेदी ने कहा कि पेड़ पौधे हमें जीवन देते हैं, बावजूद हम उन्हें नष्ट करते हैं जो अफसोसजनक है। सुमित शाह ने बताया कि सोनभद्र की धरा को हरा भरा करने का उनका सपना है, वे दुर्लभ पेड़ों से यहां की धरती को परिपूर्ण कर देना चाहते हैं।
